ऊचे सोच वाले लोग यह भूल जाते है कि जो वे कह रहे है वैसा नहीं है
जबकि सभी लोग अपनी जगह सही सोच रहे है पर फिर भी उनकी कोइ भी नहीं सुनता है
तो फिर वो समाज के लिए क्यों सोचे जैसा कलयुग में चल रहा है उसी में वह भी अपना उल्लू सीधा करने में लगा है
फिर भी एक मिनिट के लिए यह तो सोचना होगा कि वह भारत के लिए कुछ सोचे